सियासतनामा

शुक्रवार, 10 दिसंबर 2010

What do the 'listing' and 'let search engines find your blog' settings do?

What do the 'listing' and 'let search engines find your blog' settings do?
प्रस्तुतकर्ता binod upadhyay/विनोद उपाध्याय पर 1:30 am
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नई पोस्ट पुरानी पोस्ट मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

brajesh upadhyay

brajesh upadhyay

brajesh upadhyay

brajesh upadhyay

brajesh upadhyay

brajesh upadhyay

brajesh upadhyay

brajesh upadhyay

vinod upadhyay

vinod upadhyay

vinod upadhyay

vinod upadhyay

विनोद उपाध्याय को सम्मानित करते संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा

विनोद उपाध्याय को सम्मानित करते संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा

brijesh upadhyay

brijesh upadhyay

फ़ॉलोअर

ब्लॉग आर्काइव

  • ►  2017 (3)
    • ►  जुलाई (3)
  • ►  2016 (7)
    • ►  जुलाई (2)
    • ►  फ़रवरी (5)
  • ►  2015 (4)
    • ►  मई (4)
  • ►  2014 (31)
    • ►  जून (1)
    • ►  मई (7)
    • ►  अप्रैल (7)
    • ►  मार्च (16)
  • ►  2012 (3)
    • ►  अक्टूबर (1)
    • ►  अप्रैल (2)
  • ►  2011 (14)
    • ►  अक्टूबर (3)
    • ►  सितंबर (2)
    • ►  अगस्त (1)
    • ►  जून (3)
    • ►  मई (2)
    • ►  अप्रैल (2)
    • ►  जनवरी (1)
  • ▼  2010 (14)
    • ▼  दिसंबर (10)
      • दया के पात्र हैं दिग्विजय
      • वोट की खातिर कुछ भी करेंगे दिग्विजय सिंह
      • भारत सबसे बड़ा भ्रष्टतंत्र
      • मनरेगा में सवा दो करोड़ रूपए की अनियमितता
      • मोदी को मिली क्लीन चिट के मायने
      • What do the 'listing' and 'let search engines find...
      • सत्ता के बावजूद शक्तिहीन कांग्रेस
      • दागदार हो रहा समाजवाद
      • गुटों में बंटी गडकरी की भाजपा
      • कल्याण की छाया से मुक्ति को छटपटा रही भाजपा
    • ►  नवंबर (4)

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
binod upadhyay/विनोद उपाध्याय
भगवान श्री राम की तपोभूमि और शेरशाह शूरी की कर्मभूमि ब्याघ्रसर यानी बक्सर (बिहार) के पास गंगा मैया की गोद में बसे गांव मझरिया की गलियों से निकलकर रोजगार की तलाश में जब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल आया था तब मैंने सोचा भी नहीं था कि पत्रकारिता मेरी रणभूमि बनेगी। वर्ष 2002 में भोपाल में अपने दोनों छोटे भाईयों विनय और स्व.ब्रजेश (पूर्व रणजी खिलाड़ी) के भविष्य की खातिर यहां रूकना पड़ा। समय काटने की गरज से अपने एक व्यवसायी जानकार की सिफारिश पर मैंने दैनिक राष्ट्रीय हिन्दी मेल से पत्रकारिता जगत में प्रवेश किया। उसके बाद अन्य कई बड़े अखबारों में काम करने के आफर आए लेकिन स्वाभिमानी प्रवृति का होने के कारण मैं कहीं नहीं जा सका। वर्ष 2005 में जब सांध्य अग्रिबाण भोपाल से शुरू हुआ तो मध्यप्रदेश की पत्रकारिता के महानायक श्री अवधेश बजाज जी की क्षत्रछाया में कुछ कर गुजरने की कोशिश की। वह तो कुछ दिनों बाद अग्रिबाण छोड़कर चले गए लेकिन मैं आज भी वहीं जमा हुआ हूं। --------विनोद उपाध्याय
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
चित्र विंडो थीम. Blogger द्वारा संचालित.